रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना में महिलाओं के स्थाायी कमीशन के संबंध में उच्चलतम न्या‍यायलय के फैसले का स्वा गत किया

नई दिल्ली : रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सेना में महिलाओं को स्‍थायी कमीशन देने के उच्‍चतम न्‍यायालय के फैसले का स्‍वागत किया है।  सिंह ने एक ट्वीट के जरिए इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा ‘मैं सशस्‍त्र सेनाओं में महिला अधिकारियों को स्‍थायी कमीशन देने के उच्‍चतम न्‍यायाल के फैसले का तहेदिल से स्‍वागत करता हूं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 2018 में अपने स्‍वतंत्रता दिवस के भाषण में कहा कि सेना में महिलाओं के लिए स्‍थायी कमीशन के विचार का समर्थन किया था और इसके लिए निती में बदलाव की घोषणा की थी।’सिंह ने कहा “सेना में महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन का ऐतिहासिक निर्णय उस समय ही आ गया था जब पूर्व रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी कि हिलाओं को सेना पुलिस में शामिल किया जाएगा। सेना पुलिस में महिलाओं की भर्ती प्रक्रिया 2019  से शुरू हो चुकी है। इसका उद्देश्‍य अपराधों की जांच के अलावा आवश्‍यकतानुसार सैन्‍य अभियानों में मदद के लिए महिला अधिकारियों की भूमिका तय करना है। रक्षा मंत्री ने कहा, ऐसे कई उदाहरण हैं जहां कुछ महिला अधिकारियों ने सेना में करीब 20 वर्ष के लंबे समय तक अपनी सेवा दी है। 2019 में, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की सभी 10 शाखाओं में महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन की अनुमति दी थी जिसमें सिग्नल सैन्य दल, इंटेलिजेंस, विमानन, इंजीनियरिंग, सेवा और आर्डिनेंस कोर शामिल है।उन्‍होंने कहा 2016 से पहले केवल 2.5 प्रतिशत महिलाएं भारतीय सशस्‍त्र सेनाओं में शामिल थीं और इसमें भी उन्‍हें युद्ध क्षेत्र में तैनात नहीं किया जाता था। रक्षा मंत्री ने बताया कि जनवरी 2019 तक सेना में महिलाओं की संख्‍या कुल सैन्‍य बल का 3.89 प्रतिशत जबकि जून 2019 तक नौसेना और वायुसेना में यह क्रमश 6.7 और 13.28 प्रतिशत थी। जून 2019 तक वायुसेना के सभी विभागों में महिलाओ की नियुक्ति हो चुकी थी। ऐसा उनकी नियुक्ति के लिए समय समय पर जारी की गई शर्तों के अनुरूप किया गया। राजनाथ सिंह ने कहा ‘’ भारत सरकार सशस्त्र सेनाओं में ‘स्त्री शक्ति’ को मजबूत बनाने का काम कर रही है और हम इस दिशा में ओर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं.।”

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