प्रधानमंत्री द्वारा जारी बाघों के अनुमान के चौथे चक्र- 2018 के अनुसार मध्या प्रदेश में बाघों की संख्या सबसे अधिक

नई दिल्ली : अंतर्राष्‍ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने नई दिल्‍ली में अपने आवास पर बाघों के अखिल भारतीय अनुमान-2018 के चौथे चक्र के परिणाम जारी किए। सर्वेक्षण के अनुसार 2018 में भारत में बाघों की संख्‍या बढ़कर 2,967 हो गई है।   इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने इसे भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और बाघों के संरक्षण की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रधानमंत्री ने इस लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए कार्य कर रहे विभिन्‍न हितधारकों की गति और समर्पण की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब 3,000 बाघों के साथ, भारत आज सबसे बड़ा और सुरक्षित प्राकृतिक वास हो गया है।         प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे के लिए कार्य की गति तेज हुई है, देश में वन क्षेत्र भी बढ़ा है।    इस अवसर पर केन्‍द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु संरक्षण मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर, केन्‍द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु संरक्षण राज्‍य मंत्री श्री बाबूल सुप्रियो; और मंत्रालय में सचिव श्री सी.के. मिश्रा मौजूद थे।   बाघों की संख्‍या में 33 प्रतिशत की वृद्धि विभिन्‍न चक्रों के बीच दर्ज अब तक की सबसे अधिक है, जो 2006 से 2010 के बीच 21 प्रतिशत और 2010 और 2014 के बीच 30 प्रतिशत थी। बाघों की संख्‍या में वृद्धि 2006 से बाघों की औसत वार्षिक वृद्धि दर के अनुरूप है। मध्‍य प्रदेश में बाघों की संख्‍या सबसे अधिक 526 पाई गई, इसके बाद कर्नाटक में 524 और उत्‍तराखंड में इनकी संख्‍या 442 थी। यह देश के लिए गौरव का क्षण है कि उसने बाघों की संख्‍या दोगुनी करने की सेंट पीटर्सबर्ग घोषणापत्र की प्रतिबद्धता को 2022 की समय सीमा से पहले ही हासिल कर लिया है।    छत्‍तीसगढ़ और मिजोरम में बाघों की संख्‍या में गिरावट देखने को मिली, जबकि ओडिशा में इनकी संख्‍या अपरिवर्तनशील रही। अन्‍य सभी राज्‍यों में सकारात्‍मक प्रवृत्ति देखने को मिली। बाघों के सभी पांच प्राकृतिक वासों में उनकी संख्‍या में बढ़ोतरी देखने को मिली।     भारत अपने यहां बाघों की संख्‍या का आकलन करने के लिए मार्क-रीकैप्‍चर फ्रेमवर्क को शामिल कर दोहरे प्रतिचयन दृष्टिकोण का इस्‍तेमाल करता रहा है, जिसमें विज्ञान की तरक्‍की के साथ समय- समय पर सुधार हुआ है।     प्रधानमंत्री ने पेंच बाघ अभयारण्‍य, मध्‍य प्रदेश के साथ बाघ अभयारण्‍यों के प्रभावी मूल्‍यांकन प्रबंध (एमईईटीआर) के चौथे चक्र की भी रिपोर्ट जारी की, जहां बाघों की संख्‍या सबसे अधिक देखने को मिली, जबकि तमिलनाडु स्थित सत्‍यमंगलम बाघ अभयारण्‍य में पिछले चक्र के बाद से सबसे अच्‍छा प्रबंध देखने को मिला, जिसके लिए उसे पुरस्‍कृत किया गया। बाघ अभयारण्‍यों के 42 प्रतिशत बहुत अच्‍छी प्रबंधन श्रेणी में हैं, जबकि 34 प्रतिशत अच्‍छी श्रेणी में, 24 प्रतिशत मध्‍यम श्रेणी में हैं। किसी भी बाघ अभयारण्‍य को खराब रेटिंग नहीं दी गई है।

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