उपराष्ट्रपति ने निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था में पुनः तेजी आने का भरोसा जताया


नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने एक कार्यक्रम में निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था में पुनः तेजी आने का भरोसा जताया और कहा कि वर्तमान मंदी अस्थायी है।इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन के 102 वें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि यह सच है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस वित्त वर्ष में कुछ चुनौतियों का सामना कर रही है, जिससे वृद्धि में कमी आई है। हालांकि उन्होंने कहा कि देश ने पूर्व एशियाई वित्तीय संकट और वैश्विक मंदी के मद्देनजर अतीत में इसी तरह की गिरावट का सामना किया था, लेकिन हर बार उच्च विकास दर को भी हासिल किया है।सरकार द्वारा क्रांतिकारी जीएसटी ‘एक राष्ट्र, एक कर, एक बाजार’, दिवाला और दिवालियापन संहिता तथा काले धन पर रोकने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए श्री नायडू ने कहा कि उनका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को ज्यादा मजबूत और लचीला बनाना था।उपराष्ट्रपति ने कहा कि जीएसटी के लागू होने के बाद 66 लाख नये करदाताओं को इसके अंतर्गत पंजीकृत किया गया है, यह अर्थव्यस्था के संगठित होने की ओर बढ़ने का संकेत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने एनपीए की समस्या से निपटने और बैकिंग क्षेत्र की हालत को सुधारने के लिए भी कदम उठाए हैं।यह देखते हुए कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार रही है, उपराष्ट्रपति ने आगाह किया कि दीर्घावधि में विभिन्न छूट और सब्सिडी को जारी नहीं रखा जा सकता है। ग्रामीण अर्थव्यस्था में विविधता लाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास के लिए ग्रामीण क्षेत्र की गैर-कृषि गतिविधियां समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

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