गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के रूप में विरासत नया जन्म ले रही है


भोपाल: राज्यपाल लालजी टंडन ने रवीन्द्र भवन में टैगोर अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव का शुभारम्भ करते हुए कहा कि टैगोर बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों की ज्ञान-परम्परा के कारण भारत विश्व गुरू रहा है। राज्यपाल ने कहा कि विश्व में अनेक विद्वान हुए हैं जो अपने-अपने विषय में पारंगत रहे हैं परन्तु टैगोर गद्य, पद्य, संगीत, चित्रकला और नृत्य जैसी अनेक विधाओं में पारंगत थे। हमारी सनातन संस्कृति और गुरूदेव की चिंतनधारा एक ही रही है। गुरूदेव भारत के ऐसे प्रथम व्यक्ति थे जिन्हें काव्य-कृति ‘गीतांजलि” पर नोबल पुरस्कार प्राप्त हुआ।इस आयोजन में राज्यपाल श्री टंडन ने  प्रभु जोशी द्वारा बनाये गये रवीन्द्रनाथ टैगोर के पोट्रेट का अनावरण किया। भारत भवन में लगने वाली चित्र-प्रदर्शनी के पाँच कलाकारों को 51000 रूपये की राशि, प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-चिन्ह देकर सम्मानित किया

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