इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय ने छत्तीसगढ़ को दी अंतर्राष्ट्रीय पहचान : सुश्री उइके


रायपुर : इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय लोकचेतना, शास्त्रीय संगीत और ललित कलाओं का सुंदर समन्वय है। अपनी लोक चेतना के साथ शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने का यह यशस्वी उपक्रम छत्तीसगढ़ को ललित कला के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खड़ा करता है। कुलाधिपति एवं राज्यपाल सुश्री अनसुइया उईके ने इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के  दीक्षांत समारोह को सम्बोधित करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर कुलाधिपति सुश्री उईके ने पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित सुप्रसिद्ध तबला वादक जाकिर हुसैन को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया।राज्यपाल ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि संगीत के क्षेत्र में जिन्होंने भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। वे हमारे बीच इस अवसर पर मौजूद हैं। मैंने देखा कि जो सहजता और सरलता मैंने आपके भीतर देखी, वही आपकी शक्ति है। उनकी इस सहजता से विद्यार्थियों को सीखना चाहिए। इसी भावना ने उन्हें इतना बड़ा मुकाम दिया है। सुश्री उइके ने कहा कि छात्र जीवन में मैंने जो सीखा, उसकी बुनियाद पर मैं आपके बीच खड़ी हूँ। जैसा कि मैं श्री जाकिर हुसैन जी को सुन रही थी, उन्होंने बताया कि 3 साल की आयु से वे संगीत सीख रहे हैं और अब भी सीखने की ललक उनमें मौजूद है। हमें उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि यह हमारे लिए गौरव की बात है कि इस छोटे से शहर में लघु भारत दिखता है। हम स्वर्गीय राजा वीरेंद्र बहादुर जी एवं रानी पद्मावती देवी जी के प्रति आभारी हैं, जिन्होंने ललित कला के प्रति समर्पित यह संस्थान हमें सौगात के रूप में दिया। 

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